
रिजर्व बैंक की मंगलवार को जारी ''बैंकिंग क्षेत्र में रुझान और प्रगति 2018-19 वार्षिक रिपोर्ट में कहा गया है, ''सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के विलय के बाद व्यापक पूंजी आधार, मजबूत, नई तकनीक और आधुनिक भुगतान प्रणाली के साथ हमारी समूची बैंकिंग प्रणाली का चेहरा बदल जायेगा। हमारे बैंकों में वैश्विक बैंकिंग क्षेत्र में अग्रणी स्थिति हासिल करने की क्षमता है।
विलय प्रक्रिया से काफी उम्मीदें
दुनिया के शीर्ष 50 बैकों में बनाया स्थान
देश के सबसे बड़ी वाणिज्यिक बैंक भारतीय स्टेट बैंक में उसके पांच सहयोगी बैंकों का विलय करने के बाद 450 अरब डालर के कुल कारोबार के साथ बैंक ने कुछ समय के लिये दुनिया के शीर्ष 50 बैकों में अपना स्थान बना लिया था लेकिन बैंक की गैर- निष्पादित परिसंपत्ति में भारी वृद्धि होने के साथ ही बैंक का कुल कारोबार कमजोर पड़ गया और यह शीर्ष 50 बैंकों की सूची में अपना स्थान बरकरार नहीं रख पाया।
प्रौद्योगिकी क्षेत्र की कंपनियों से बढ़ती प्रतिस्पर्धा
रिपोर्ट में हालांकि, बैंकों को वित्तीय प्रौद्योगिकी और दूसरी बड़ी प्रौद्योगिकी क्षेत्र की कंपनियों से बढ़ती प्रतिस्पर्धा को लेकर चेतावनी भी दी गई है। इसमें कहा गया है कि वैश्विक आर्थिक वृद्धि की रफ्तार कमजोर पड़ने की वजह से पूरी दुनिया में वित्तीय प्रणाली पर असर पड़ा है। खासतौर से बैंकों पर इसका ज्यादा असर देखा जा रहा है। इस सुस्ती के कारण बैंकों का मुनाफा कम हुआ है और उनका कुल कारोबार सिकुड़ा है।
भुगतान बाजार के बड़े हिस्से पर इनका कब्जा
यहां यह उल्लेखनीय है कि गूगल, अमेजन, व्हट्सएप, फेसबुक जैसी वैश्विक कंपनियां और पेटीएम व दर्जनों दूसरी प्रौद्योगिकी कंपनियों ने अपनी नई प्रौद्योगिकी के बल पर भुगतान बाजार के बड़े हिस्से पर कब्जा कर लिया है। बैंकों पर भी इसका असर पड़ रहा है।
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सरकार ने सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों को मजबूत बनाने के लिये इस साल अगस्त में 10 सरकारी बैंकों का विलय कर चार बैंक बनाने का फैसला किया। इसके तहत आरिएंटल बैंक आफ कामर्स और यूनाइटेड बैंक आफ इंडिया को पंजाब नेशनल बैंक में मिलाने का फैसला किया गया। इस विलय के बाद पंजाब नेशनल बैंक देश में स्टेट बैंक के बाद दूसरा बड़ा बैंक होगा। इसी प्रकार सिंडीकेट बैंक का केनारा बैंक में विलय करने, आंध्रा बैंक, कारपोरेशन बैंक का यूनियन बैंक में विलय करने तथा इलाहाबाद बैंक को इंडियन बैंक में मिलाने का फैसला किया गया।
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यह प्रक्रिया अगले साल मार्च तक पूरी हो जाने की उम्मीद है। इसके बाद देश में सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की संख्या मौजूदा 19 से घटकर 12 रह जायेगी। इससे पहले 2017 में इनकी संख्या 27 तक पहुंच गई थी। सरकार ने इससे पहले पिछले वित्त वर्ष में विजय बैंक और देना बैंक का बैंक आफ बड़ौदा में विलय कर दिया था। वर्ष 2017 में भारतीय महिला बैंक और स्टेट बैंक के पांच सहयोगी बैंकों का भारतीय स्टेट बैंक में विलय करने का काम किया गया। नकदी संकट से जूझ रहे गैर- बैंकिंग वित्तीय क्षेत्र (एनबीएफसी) के बारे में रिपोर्ट में उम्मीद जताई गई है कि वह जल्द ही इस संकट से बाहर निकलेंगे। हाल के महीनों में नकदी की स्थिति में काफी सुधार आया है।
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